Rajasthan Patrika
Climate crisis impact: कल्पना कीजिए, एक ऐसा डॉक्टर जो सालों से चेतावनी दे रहा हो- सावधान हो जाइए, बीमारी बढ़ रही है! लेकिन मरीज हर बार मुस्कुराकर कह दे-अभी नहीं, बाद में देखेंगे। आज हमारी धरती भी कुछ ऐसी ही स्थिति में है। वह बोल नहीं सकती, लेकिन कभी तपती दोपहर में रिकॉर्ड तोड़ती लू बनकर, कभी कुछ घंटों में महीनों की बारिश बरसाकर, कभी सूखे से फटती धरती की दरारों में, तो कभी बाढ़ में डूबते शहरों की चीखों में चेतावनी दी रही है…। प्रकृति लगातार हमें संकेत दे रही है कि कुछ ठीक नहीं है। लेकिन हम हर बार यह सोचकर आगे बढ़ जाते हैं कि ऐसा तो हर साल होता है।
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