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SPIEF 2026 में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का संबोधन; संस्कृति और वेलनेस पर दिया जोर | Collector
SPIEF 2026 में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का संबोधन; संस्कृति और वेलनेस पर दिया जोर
Sudarshan News

SPIEF 2026 में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का संबोधन; संस्कृति और वेलनेस पर दिया जोर

रूस के सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में इस वर्ष एक अलग दृष्टिकोण देखने को मिला, जब आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने आर्थिक विकास में संस्कृति, मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों की भूमिका पर जोर दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संरक्षण में आयोजित इस मंच पर उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य को केवल निवेश और तकनीक तक सीमित न मानकर उसे मानव कल्याण से जोड़ने की आवश्यकता बताई। अपने संबोधन में गुरुदेव ने कहा कि आज दुनिया मानसिक तनाव, चिंता और स्वास्थ्य समस्याओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में वेलनेस सेक्टर वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने योग, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत में आयुष मंत्रालय की स्थापना ने इस दिशा में बड़ा योगदान दिया है। गुरुदेव ने कहा कि आज हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में योग, ध्यान और संगीत जैसी पद्धतियां लोगों के जीवन में संतुलन ला सकती हैं। उन्होंने रूस में योग और वेलनेस के प्रति बढ़ती रुचि का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश इस क्षेत्र में मिलकर बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं। गुरुदेव ने भारत और रूस के बीच पर्यटन, वेलनेस और छात्र आदान-प्रदान को भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों के बीच जन-स्तरीय संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने ओडिशा स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय और रूस की यूराल फेडरल यूनिवर्सिटी के बीच हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि शैक्षणिक साझेदारी भविष्य के रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संस्कृति केवल मनोरंजन या विरासत नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला भी है। उन्होंने अपने विश्व संस्कृति महोत्सव के अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह अलग-अलग देशों के लोग संगीत, कला और परंपराओं के माध्यम से एक मंच पर आते हैं। गुरुदेव ने बताया कि जर्मनी और भारत में आयोजित वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल में लाखों लोग और हजारों कलाकार शामिल हुए। इस आयोजन ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा दिया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन बिना प्रतिस्पर्धा के वैश्विक स्तर पर सहयोग और भाईचारे को मजबूत करते हैं। इस मंच पर गुरुदेव के साथ कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिनमें रूस और भारत के राजनयिक, विभिन्न राज्यों के मंत्री और क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। चर्चा का केंद्र उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषय रहे।

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