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बड़ी-बड़ी कंपनियां कई बार केवल उन कॉलेजों के बच्चों को ही मौका देती हैं जो नामी हों. ऐसा ही एक घटना भारतीय छात्र के साथ भी हुई. एक सिंपल कॉलेज के छात्र को केवल इसलिए नौकरी नहीं मिली क्योंकि उसके पास स्टैनफोर्ड, एमआईटी या आइवी लीग जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं थी. लेकिन सिर्फ छह महीने बाद उसे एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बैकएंड इंजीनियर की नौकरी मिल गई, जो 4 करोड़ से ज्यादा यूज़र्स को सेवा देता है. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि टेक इंडस्ट्री में हायरिंग डिग्री के आधार पर होनी चाहिए या असली स्किल पर.
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