Dainik Bhaskar
नीट पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े विवादों की जांच कर रही संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और CBSE से कई तीखे सवाल पूछे हैं। साथ ही दोनों संस्थानों को तलब कर लिखित जवाब मांगे हैं। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने NTA से पूछा है कि उसकी नजर में ‘पेपर लीक’ की परिभाषा क्या है, जबकि CBSE से पूछा कि क्या OSM का ठेका देने से पहले कोएम्प्ट (Coempt) कंपनी के बैकग्राउंड जांच की थी? कोएम्प्ट डायरेक्टर के ग्लोबारेना कंपनी से कनेक्शन पर सवाल समिति ने सवाल किया कि क्या बोर्ड को इस बात की जानकारी थी कि कंपनी के डायरेक्टर पहले 'ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज' से जुड़े रहे हैं। दरअसल, 2019 में तेलंगाना 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर ग्लोबारेना के सॉफ्टवेयर को दोषी पाया गया था। बाद में कंपनी का नाम बदलकर कोएम्प्ट कर दिया गया। आरोप है कि CBSE ने इस विवादित रिकॉर्ड को नजरअंदाज करते हुए कंपनी को ठेका दिया। समिति ने सवाल किया कि OSM के तीसरे टेंडर में खराब रिकॉर्ड वाली कंपनियों को अयोग्य ठहराने की शर्त क्यों हटाई गई। साथ ही, 12वीं की आंसर शीट की स्कैनिंग में मॉडर्न रोबोटिक स्कैनर की बजाय सामान्य स्कैनर इस्तेमाल करने की इजाजत क्यों दी गई। NTA से पूछा- क्या 2018 से किसी परीक्षा में पेपर लीक हुआ? समिति ने NTA से पूछा है कि 2018 से अब तक उसके द्वारा आयोजित परीक्षाओं में क्या कभी पेपर लीक हुआ है। दरअसल, हाल ही में NTA अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि केवल एक 'गेस पेपर' प्रसारित हुआ था। समिति ने NTA के आंतरिक ढांचे और मैनपावर पर पूरा ब्योरा मांगा है। एजेंसी से पिछले तीन साल के दौरान काम कर रहे कुल कर्मियों की संख्या की डिटेल और 2022 से अब तक विभाग में की गई सभी नई नियुक्तियों की जानकारी देने के लिए कहा गया।
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