Rajasthan Patrika
India fertility rate: एक समय भारत में स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थलों पर ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’ या ‘हम दो-हमारे दो’ जैसे स्लोगन लिखे नजर थे। 70 के दशक में तो जनसंख्या नियंत्रण के लिए नसबंदी अभियान तक चलाए गए। यानी आबादी बड़ी चिंता थी और परिवार नियोजन को विकास की शर्त माना गया। लेकिन छह दशक बाद तस्वीर बदल गई। अब चिंता ज्यादा नहीं, बच्चे कम पैदा होने पर है। हालिया जनसांख्यिकीय आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में सबसे बड़ी और युवा आबादी वाले भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) घटकर 1.9 पर आ गई है। यानी औसतन एक भारतीय महिला दो से भी कम बच्चों को जन्म दे रही है, जो 1985 में 4.6 था। किसी भी देश में आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए 2.1 की दर आवश्यक मानी जाती है। इससे नीचे जाने का अर्थ है कि आने वाले दशकों में आबादी की वृद्धि धीमी पड़ेगी और फिर यह घटने लगेगी।
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