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कुशीनगर। जनपद के कप्तानगंज क्षेत्र से सामने आए एक पारिवारिक विवाद ने कानूनी और सामाजिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (दरोगा) पद पर तैनात धीरेंद्र प्रताप सिंह और उनके परिजनों ने पत्नी द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। परिजनों के अनुसार वर्ष 2019 में प्रशिक्षण के दौरान धीरेंद्र प्रताप सिंह की बातचीत राजनंदनी सिंह नामक युवती से शुरू हुई थी। उनका दावा है कि बातचीत युवती के प्रयास से शुरू हुई और समय के साथ दोनों के बीच प्रेम संबंध स्थापित हो गए। परिवार का आरोप है कि वर्ष 2020 में धीरेंद्र प्रताप सिंह के नौकरी संबंधी विवाद के कारण घर पर रहने के दौरान दोनों के संबंध समाप्त हो गए थे। परिजनों का कहना है कि लगभग दो वर्ष बाद धीरेंद्र प्रताप सिंह को पुनः नौकरी मिलने के बाद सितंबर 2022 में युवती द्वारा उनके खिलाफ दुष्कर्म और गर्भपात कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया। परिवार का दावा है कि मुकदमे के बाद युवती की ओर से विवाह का प्रस्ताव रखा गया, जिसके बाद गोरखनाथ मंदिर में दोनों का विवाह संपन्न हुआ। परिजनों का कहना है कि विवाह धीरेंद्र प्रताप सिंह के परिवार की सहमति के बिना युवती के परिजनों की ओर से कराया गया था तथा विवाह से संबंधित फोटोग्राफ भी उनके पास मौजूद हैं। परिवार का आरोप है कि विवाह के कुछ ही दिनों बाद युवती द्वारा विवाह पंजीकरण कराया गया और उसके बाद सेवा पुस्तिका में नाम दर्ज कराने, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड एवं कुटुंब रजिस्टर में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वहीं दूसरी ओर दर्ज आपराधिक मुकदमा भी जारी रखा गया। धीरेंद्र प्रताप सिंह और उनके परिजनों का आरोप है कि विवाह के बावजूद पत्नी कभी उनके साथ रहने नहीं आई। उनका कहना है कि उन्होंने पत्नी को साथ रखने और वैवाहिक जीवन सामान्य बनाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। परिवार का दावा है कि एक ओर दुष्कर्म का मुकदमा चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण संबंधी मुकदमे भी दायर किए गए हैं। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब धीरेंद्र प्रताप सिंह के छोटे भाई के विवाह समारोह के दौरान विवाद उत्पन्न हो गया। परिजनों का आरोप है कि युवती अपने समर्थकों के साथ उनके घर पहुंची और विवाद खड़ा कर दिया। परिवार का कहना है कि विवाद का उद्देश्य संपत्ति पर दावा स्थापित करना था, जबकि धीरेंद्र प्रताप सिंह को उनके पिता द्वारा वर्ष 2023 में चल एवं अचल संपत्तियों से बेदखल किया जा चुका है तथा संपत्ति की वसीयत छोटे पुत्र के नाम की जा चुकी है। परिजनों का आरोप है कि विवाद के बाद मामला स्थानीय थाने पहुंचा, लेकिन उनके पक्ष को गंभीरता से नहीं सुना गया। उनका कहना है कि बाद में युवती की तहरीर पर एक और मुकदमा दर्ज कर लिया गया, जिसमें धीरेंद्र प्रताप सिंह के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों को भी शामिल किया गया। परिवार का दावा है कि घटना के दौरान धीरेंद्र प्रताप सिंह की मां समेत अन्य लोग घायल हुए थे, जिनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने भी शिकायत दी थी, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध हैं, जिनकी जांच से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है। धीरेंद्र प्रताप सिंह की मां ने प्रशासन और सरकार से न्याय की मांग करते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव झेल रहा है। उनका आरोप है कि पूरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन पर पूरा भरोसा है तथा यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। नोट: यह समाचार धीरेंद्र प्रताप सिंह एवं उनके परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में दूसरे पक्ष का बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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