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जहां एक तरफ मौत का सन्नाटा होता है और दूसरी तरफ जीवन का उत्सव, जहां शोक और श्रद्धा एक साथ बहते हैं- वो जगह है काशी का मणिकर्णिका घाट. यहां चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर सदियों पुरानी ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो हैरान करती है. जलती चिताओं के बीच नगरवधुएं बाबा मसान नाथ को नृत्यांजलि अर्पित करती हैं.
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